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कुछ सीमा तक फलीभूत हो सकती हैं। हालाँकि, ध्यातपूर्वक देखने से स्पष्ट होता है कि यह सीमा निश्चित रूप से सामाजिक परिस्थितियों वर निर्भर करती है। फिर, ससार के उैज्ञानिक तकतीकी उपलब्धियों के परिणाम स्वरूप, एक ही व्यवसाय मे सलग्न विभिन्‍न देशो के लोगो के काम समान तक्नीवी प्रश्निया, सशीनीकरण या स्वचलयत्रीकरण के स्तर तथा कामग्रार की निपुणता पर समात साँगो द्वारा वणित हैं। बाह्टे आदमी कही पर भी रहे, वैज्ञानिक व॑ तकनीती प्रक्रिया ने उपलब्ध आवास, सेवाओ उपभोवता माल को अधिकतर दरावरी पर ला दिया है और अन्त मे, आधुनिक सचार साधन सस्ह्ृति के वाह्म स्वरूपो, व्यवहार जीवन के तरीके का विस्तृत प्रसारण करते हैं। सिनेमा, ठेलीविजन, समाचारपत्र, सगीत तथा अन्तर्राष्ट्रीय पयंटन के प्रभाव के अन्तर्गत रुचियाँ, व्यंव- हारिक प्रतिमान उपभोकता स्तर सावंभौमिक बनने की ओर प्रवृत्त हैं। बर्तेमान परिवार में हो रही वर भ्रक्रियाएँ भी सार्दभौमिक हैं ससार के अधिकाश हिंध्सो मे बच्चों वाली स्त्रियों को बढती हुई सख्या थ्रमशवित में शामिल है, जम्म-दर गिर रही है और तलाक की सश्या बढ़ रही है ये घटनाएँ और विभिन्‍न देशों मे जनता के समक्ष खडी अनेक समस्याओ में ग़मानता यह आभास दे सकती है कि उनका जीवन भी समान है क्या ऐसे निष्कर्ष का औचित्य है ? विभिल्न जीवन-पद्धति की विषय-वस्तु का निर्णय सिर्फ बाह्य रुप से नहीं हों सकता है। इसके लिए एक अति महत्त्वपूर्ण मूल प्रश्व का उत्तर देता आवश्यक है, कि देश की सम्पत्ति, वैज्ञानिक 4 तकनीकी उपलब्धियां सामाजिक श्रगति से कौन रादसे पहले साभ उठाता है ? यह या वह कौन सी जीवन-पद्धति जनता वो देती है नौकरों के अवसरों की गारण्टी अथवा भविष्य के प्रति निरतर अति श्चितता ? सम्रात काम पर समात वेठन अथवा भेदमाव ? अपनी शिक्षा और कोशल को तिरतर सुधारने का अवसर अथवा व्यवगायिक तरक्की के मामससे पर अनिश्चितता 'अधवा' को यह सूची बढ़ाई जा सती है! दूसरे शग्दों मे, सोग बेसे जीते हैं ही जीवन-पद्धति है बयां पुरुष और छ्तियाँ अपने व्यक्तित्व को पूरी तरह से साकार करते हैं, श्रम, राजनीति सारहतिक शनिविधियों में सत्रिय भाग सेते हैं। इस गठिविधि की मात्रा पर ही परिवार के मधुर सम्बन्ध मौर इसलिए उसकी सम्रूची खुशी ठिरभर करती है। कश धमाज परिवार को इसकी समस्याओं को सुसझाते से मदद रता है अथवा ये परिवार बी, स्मी पर विर्भर हुए डिता स्यक्ति की स्पकििगव बिता है। औवन-वद्धति समूचे प्ररिदार और ब्यकिति दा स्यक्ियों के गएह अैते परिदार के मध्य साम्दत्थों द्वारा बित्रित होती हैया राजतीविक सर्थ शास्त्र के शब्दों से,

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जबोश 4९. ग् साप्ताजिक-आधिक प्रणाली व्यविदयों की गतिविधि के मध्य, सम्बन्ध द्वारा बर्णित होती है

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जीवन-पद्धति विविध सामाजिक घटकों, यथा, बाधिक, सामाजिक, सास्के लिंके +० ७.

नैतिक--द्वारा निर्धारित होती है। भोतिक उत्पादन मानव समाज दा आधार

निर्मित करता है, क्योंकि यह जनता को उनको जरूरतों की सन्तुष्टि के लिए आवश्यक चीज़ों को प्रदान करता है और सप्ताज के सामाजिक ढाँचे, इसको विचारधारा सस्याओ को निर्धारित करते हैं। भोतिक अत्पादन में परिवतंन सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रो मे परिव्तंनों को प्रभावित करता है।

उत्पादन प्रक्रिया में लोग खुद मे उत्पादन के सम्बन्ध बनाते हैं। उत्पादन के सम्बन्ध स्वामित्व के स्वरूप से निर्धारित होते हैं, अर्थात्‌, उत्पादन के साधनो-- भूमि, इसकी निज सम्पत्ति, जगल, पाती, *च्चा माल, उत्पादन के सस्थान आदि से लोगो का सम्बन्ध उत्पादन में और इसलिए समूचे समाज में विभिन्‍्त सामाजिक गुटों की स्थिति स्वामित्व की प्रकृति पर निर्भर करता है यदि स्वा- मित्व व्यवितगत है (जिसमे उत्पादन के साधन व्यक्तियों के हैं), यह प्रभुता दासता--शोपण, वर्ग-विरोध के सम्वन्धों का आधार बनता है यदि स्थामित्व सामाजिक है (जिसमे उत्पादन के साधन जनता के हैं) तब वर्गों के मध्य सम्बन्ध एकता परस्पर सहयोग कय स्वरूप अपना लेता है।

सोबियत संध मे देश को सम्पत्ति राज्य के रूप मे थम-रत जनता की है।

25 अक्टूबर (7 नवस्वर) 97 को भ्रसिको ने समरत सत्ता अपने हाथो में लेबर रूस में एक समाजवादी क्रान्ति की इसने देश के इतिहास में एक नये युग, समाजवाद के युग का आरस्भ किया। श्रमिको के स्वप्नो को, समस्त जनो के लिए न्याय के बारे में वेशनिक सिद्धान्तों को कास्तविकतां से वदलने से सोवियत राज्य पहला राज्य था।

एक बार रुत्ता पाकर, श्रमिक जनो ने बडे उधोगो, रेलबोडों, बैंको, भूमि, फैक्टरियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया और मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण को, दमन के हर स्वरूप को समाप्त कर दिया। सोवियत सता के पहले ही दिन शान्ति पर आज्ञापत्र पारित करके जनता राष्ट्रों के मध्य शान्ति के लिए एक अपील रखी

]977 मे हगरी के लेखक गयोर तारोस्ड ने टिप्पणी वी, “मानव इतिहास में पिछले 60 घर्ष अत्यन्त महत्त्वपूर्ण रहे, रेडियो अतरिक्ष को जाने वाले यानों

* के आविष्कार, सापेक्षता के सिद्धांत आणविक ऊर्जा के कारण नही, वल्कि सबसे अधिक इस स्य से कि अक्टूबर ऋ्ति के विजय के साथ स्वतत्त्रता के लिए, शान्ति एकता में रहते हुए अपने भविष्य को नियोजित करने से मानवता के लिए एक दोस सीव प्रथम समाजवादी देश से रखी गई ।” समाजवादी आधार पर जोवन का पुनः निर्माण एक आसान वाय॑ था। समाजवाद के निर्माण मे ध्यस्त

रहते हुए पारयों श्रमरत अतों को, पुष्थ वे रित्रियों को अतीत की तिब्कियना को पराजित कर्ता था तथा अस्यवद्यार्य नियमों, परस्णशाओं प्रषाओं वे विस्द आपषर्ष करता था। श्रम से, रघतारमक घोर से नवीन को रघारित करता था। युदा रौदियत गणवत्र शैतित् हस्तशेषर वे गृदृपुद्ध, पराजित वर्गों के अवे्ेषों के प्रतिरोध, पूँजीवादी देशों क्री आधपिकर मारेशदी रथांआयिक अय्यवस्था से ग्रतित थां। सामाजिब निर्माण देश की साम्राजिक, भ्राथिक , तत नी की सारहे विक पिछडपन से रबा हुआ था। समाजवाद के निर्माण मे परेशानिय इस बात मे भी गम्भीर थी कि सगभग 30 वर्षों के लिए सोवियत सघ समार का एकमात्र समाज- वादी देश था और उसे अकेले सापझ्माज्यवादी शक्तियों की आत्म गायंवाहियों से जूझतां था। यह साआाज्यवादियों की राजनीतिक आधिक नाबेबन्दी से होकर गुजरा लगभग दो दशकों के अपने सक्षिप्त इतिहास में सोवियत जनो को साप्राज्यकादी आक्रमण के विरद्ध देश की सुरक्षा करते का ओर युद्योपरात्त आधिक रूप भे पूर्व स्थिति लाने के लिए अपनी शक्तियों को मोडते को बाध्य होता पड़ा नाड़ी जमंती के विरुद्ध ।94-45 के महान देशभवित के युद्ध के कठिन परीक्षण में सोवियत जतो को विश्येप क्षति उठानी पड़ी दो करोड से अधिक लोग मरे, 70,000 से अधिक शहर गाँव बर्बाद हो गये, लगभग 32 हजार औद्योगिक मस्थान सष्ट हो मये, दसियो हजार अस्पतालों, स्कूतरों, तकनीकी स्कूलों, उच्चतर विद्यालयों पुस्तकालयों के साथ 65 हज्ञार किलोमौटर रेल लाइन नष्ट हो गपी | और 00,000 सामूहिक राजरीय फार्म लूट लिये गये--यह उस भयावह युद्ध का परिणाम था आज भी अपने प्रिय के शोक मे डूबे माँओ पतियों को देखा जा सकता है। इतिहास मे ज्ञात अत्यन्त विनाशकारी युद्ध मे सोवियत जन की विजय॑ समोज- वादी जीवन-पद्धति की जीवच्णुता को स्पष्टत दर्शाती है। यह युदोपरात देश के पुन निर्माण से भी घिद्ध हो जाता है, जो अभरुतपुर्द सक्षिप्त काल में पूरा हो गया 98-2 के गृहयुद्ध के पश्चात्‌ देश की अर्थव्यवस्था को पुन स्थापित करने में 6 बर्षे लगे महान देशभक्त के युद्ध मे अतुलतीय क्षति के पश्चात्‌ ओद्योगिक रूप में पूर्वेश्थिति को पूरी तरह से 28 ब्षों में प्राप्त कर लिया गया। सोवियत आधिक प्रणाली का आधार, जैसा सोवियद सघ के सविधान मे कहा गया है, समाजवादी आर्थिक प्रणाली उत्पादन के साधनों पर समाजवादी स्वामित्व है! समाजवादी राज्य के समस्त मागरिक इसके समान स्वामी हैं 4 भूमि, दूमकी खनिज प्रम्पत्ति, पानी, जगल, फक्टरिया, खदानें, खान, बैक, रेलवोड्ड, जल, वायु स्थल परिवहन, सचार साधने, शैक्षणिक सास्कृतिक सस्थाएं, सेका सस्पात, आधारभूत बावामोय कोष--ये सब जनता की सम्पत्ति हैं रे मार के 5

9

सामूहिक फार्म सहकारी सम्पत्ति सामाजिक स्वामित्व का एक प्रकार है इस प्रकार की सम्पत्ति की स्थापना दूसरे दशक के अन्त में तथा तौसरे दशक के आरम्भ में हुई जब किसान स्वेच्छा से हु थि सहकारी समितियों (सामूहिक फार्मों) में संगठित हुएं। सामूहिक फार्म की सम्पत्ति मे उत्पादत के साधन तथा फार्म के सामूहिक कार्य मे आवश्यक अन्य साधने भी आते हैं। भूमि राज्य की है परस्तु यह सामूहिक फार्म को अनवरत नि शुल्क उपयोग के लिए दी गयी है सामूहिक फार्म के एक किसान को सहायक छोटे क्षेत्र रखते की इजाजत है, जिसके लिए उमे भूमि का एक भाग दिया जाता है। सिर्फ परिवार के भमदस्य हीं सहायक भूमि पर काम करते हैं। भाडे पर श्रम का उपयोग कानूती रूप में निधिद्ध है, क्योकि उसका अर्य होगा शोषण जो समाजवाद के साथ असम्बद्ध है। सामूहिक फार्म के एक क्सित को पशु, कुबकुट आवश्यक हि उपकरणों को रखने का अधिकार है। प्रत्येक परिवार को, प्रत्येक सोवियत तागरिक को व्यक्तिगत सम्पत्ति रखने का अधिकार है जिसमे दैनिक उपयोग, व्यक्तिगत उपभोज्य सुविधा की वस्लुएँ हैं इसमें काम से उसकी आम, बचत, घर, बगीचा, सहायक भूमि, गाड़ी, नाव भाद्रि आते हैं. दनिक उपयोग की वस्तुओं में व्यक्तिगत सम्पत्ति व्यक्तिगत स्वामित्व से मूलत भिन्न है। ध्यवितगत स्वामित्व का अर्थ होता है उत्तादन के घाधतों पर स्वामित्व और सोवियत सघ मे, हम फिर से कहेगे, ये सम्पूर्ण जन की सम्पत्ति हैं। सामाजिक अर्थव्यवस्था में ब्यक्रित का काम ब्यवितगत सम्पत्ति वा प्रमुख स्रोत है। ब्यविनेगत सम्पत्ति को प्राप्त करने का अवसर प्रत्येक श्रमिक के कौशल थोग्यता, श्रम के निवेश पर निर्भर है। एक अधिक प्रवीण वधा अधिक समरथंदान श्रमिक सामाजिक उत्पादन के बड़े भाग का योगदान करता है और इसलिए समाज से अधिक पाता है समाजदादी प्रणाली के विरोधी कम्युनिस्टो पर समस्त सम्पत्ति को निरस्त करने का आरोप लगाते हैं। ऐसा नहीं है। समाजवाद प्रत्येक को सामाजिक उत्पाद के एक भाग को पाने का तथा जैसा घाहे उपभोग करने का अवसर देता है। यह सिर्फ क्न्य ब्यक्षित के अम पर ऐसा करने के अवसर को निषिद्ध करता है। उत्पादन के साधनों के व्यक्तिगत स्वामित्व को समास्ति तथा सम्प्रन्ति के समाजवादी रूप वी स्थापना ने परिवार की आर्थिक विधय-वस्तु को बदल दिया है। समाजवाद के अन्तर्गत परिवार समाज का अब सैल नहीं है जिसमे व्यक्विग्रत- मशत्ति के सम्बन्ध पुनः स्थावित होते हो और उत्पादन के साधन इकट्ठा होते और उत्तराधिवारी को माप जाते हों। साथ ही परिदार अपनी गृदस्थी चलाता है, अपनी आप स्पय का बजट बनाता है; परिवार के आर्थिक क्रियाक््खाप इसके सदस्यों

स्ट्राता अर

40

के आपकक के अधिक कह बा कादुक रा को कटरा दे कक अत पैए

हतुप्त #ै (किक किक की ९6 7३३ करी ड़ है हा शवाए शत इंसूच तर ३७५ का बच हा आया है हट इदक हकक कपुहहहत्व बायहप अद्धती है ज₹|९ ढ! ही 8 यो टरक थे ह।ह ज+ह आवजिएऱ है! (हहह जड़ हब हुवा हु शाप जि इटादिव रा? और अधदिर गपुराक रत हमेक्दाइ का शाप है।

संगरक रहट्राद विकात दाजकाएँ हुक कप के भोए विश है / 8 ध्वकाबा के लिए लिंक हरब्र के आरी 4 दर्शक का हि दिए! है ्नाः पीहिक भरा बबान देश जी टृगर हकक 4 & थे घूरदा यश के बुढओव दे कंगन थे और बाद में (०१ का €ह। 6बा गमाजपाए की सटे का जे शाषप 4 वहियाम हवब्प ब्य ढक दा थ! ब/ 047 वह काए में रात में अपर विशसितर अधष्यवादा गरह(त के विजाज शापएव हधिफ्कमो बग गया

गगाजवा दी अपवब्यरादा ककिशाएवी उच्यादर शहिकका तहज़ीओी की रो गही ढगे मे बने उद्दाग बे मशीनीहत फू है अश्धार पर बाप जरती है दशा ये) घाज घार दशका मे (9738 तर) भय सरुत रादोर उहाइत 8 गुणा बढ़ाने उदास श्रति थ्वमित विदुत्‌ जी पूति को सगभय 8 गुदा * हषा एवि में 45 गुणा से अधिक वृद्धि करने बोर बताया

मोविया रोध अड विश्व के ओऔद्धोंदिक उत्पाद का | भाग उत्पादित ९' है। यट स्टोस, तैस शोधर, तोह वे मंगतोज के अपरक, कोकफ जे उत्पादत, या खाई, धीमेन्ट, डीजस रे घसने वासी गाहियों सांदि मे परले रघान पर है /

सोवियत जसा को अपसी उपर्तान्धियों पर सर्व है। परन्तु इसका अर्थ यह + है ति उन्हें परेशानियाँ ने थी और थे मियाँ देखते मे असफ्ल रहे जितसे अधिक अच्छी तरह गे रहने ते विए उबरना था श्रम-रत जन उत्पादन वे '् उत्पादकता शी धामता को बड़ाने मे तरीकों के जिए उत्पादन से विज्ञान ततनीकी उपलब्धियों के ब्रचलत को बढ़ाते के लिए उपभोवता के माल के के दायरे को सुधारते बढाने के लिए सम्मेलनों समाचार»पत्रों में ठोस प्रस्त देग करते हैं

फरवरी 98] मे सोवियत सघ की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपनी 26बी कापग् गठित की | इसने (98-85 के लिए तथा 990 मे रामाप्त होने वाले समय लिए सोवियत संघ के आधिक सामाजिक विकास हैतु रूप-रेथाएँ' स्वीकारी अविष्य के लश्यों को तिर्धारित करने मे, अर्थात्‌ ग्यारहवी पचवर्षीय वाल ( 98। 89) हुए समूचे आटिवें दशक के लिए, 60 सघ की कम्युनिस्ट पार्टी ने अपन आिक नीति वो इस अटल सिद्धात पर कि सब कुछ मनुष्य के नाम पर, सब कु

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मनुष्य की भलाई के लिए' आधारित अपनी नीति की निरतरता को सुनिश्चित किया। पार्टी ने आगे के दशकों के लिए, जनता की समृद्धि को आगे बढ़ाने के लिए एक विराट कार्यक्रम प्रस्तावित किया है, जिसमे खाद्य सामग्री तैयारशुदा वस्तुओं के उपभोग मे वृद्धि, घरेलू आवश्यकताओ की अधिकतम सन्तुष्टि, अधिक सुसस्कृत बनने, काम विश्राम की परिस्थितियों में सुधार अत्ते हैं सोवियत सघ वी कम्युनिस्ट पार्टी की 26वी काग्रेस के मच से एक बार फिर शात्ति को सुरक्षित करने की, आणविक ज्वाला को निषेध करने की, अविवेकी तथा भयानक शस्त्र दौड को सीमित करने की जोरदार अपील गूंजी | सोवियत जनो वो उनके समक्ष रचनात्मक वारयों को सुलझाने, मनुष्य के लायक भविष्य का निर्माण करने के लिए शान्ति की आवश्यक्ता है। मोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी वी 26वीं काग्रस की कंस्द्रीय समिति मे लियोनिंद श्रेशनेव ने दिष्यणी की “मोवियत जन भविष्य को विश्वास के साथ देखते हैं परन्तु यह आशावादिता नियति के कृपापात्र का आत्म-विश्वास नही है हमारे लोग घादते हैं कि वे हर चीज को स्वय के थम से निध्रित कर रहे है और अपने स्वय के छून से सुरक्षित कर रहे हैं फिर, हम आशाबादी हैं क्योकि हमे थम भी शक्ति पर विश्वास है, फ्योंकि हमे अपने देश पर, अपनी जनता पर विश्वास है। हम आशावादी है क्योकि हमे अपनी पार्टी पर विश्वास है और हम जानते हैं कि जिस भाग की ओर यह हमे ले जा रही है वही निश्चित है।”! सोवियत सध की कम्युनिस्ट पार्टी की केदद्रीय समिति की मई 982 की ध्लेनरी बैठक ने सोवियत सघ ने खाद्य कार्यक्रम को 990 तक के काल के लिए स्वीकारा, जिस्ले सोवियत सघ की कम्युनिस्ट पार्टी की 26वीं काप्रेस के निर्णयो के अनुर॒प विस्तृत किया है दसके पचवर्षोय समय (]976-80) के दौरान प्रमुख कृषि उत्पादों के उत्मादन में सातवें पचवर्धीय समय (96-65) की तुलना मे पर्याप्त वृद्धि हुई। अन्त का ओसत वाधिक उत्पादन 3 करोड 3 लाख इन से 20 करोड़ 50 लाख टन बढ़ गया, चुकन्दर का उत्पादन 5 करोड 92 लाख से 8 करोड 87 लाख टन अधिक हुआ। अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन मे भी सम- पूल्य वृद्धि हुई ]5 वर्षों मे प्रति व्यक्त मोश्त तथा गोश्त के उत्पादों के उपभोज्य में 4॥% चूद्धि हुई, दूध दूध के उत्पादों में 25%, अण्डो मे लगभग 00%, सब्जियों से 35%, वनस्पति तेल में 24% और चीनी में 34% वृद्धि हुई। हालाँकि, अभी भी यह जतसब्या को सौँग से कम है। इसीलिए, श्रमिक भन के

जीवन-हतर को युधारते की घिस्तरा के सिद्वात की ध्यान में रखते हुए पार्टी ने खा कार्यक्रम जो स्वीरारा है, जा हृधि उत्पादों के उत्थादन जी वृद्धि हेतु दया गोर दूध, फल आदि की समान पूर्ति को गारटी देने के काम को रुम समय से सुतश! हेतु बतया गया है

गाँव के पुन निर्माण बे! लिए उपाय बाय कम जा मुख्य अग है दसके अल' स्यकितिगत सहयोगी क्षि के लिए बाह्य इमारत के साथ आधुनिक सुविधाओ मकानों का निर्माण अधिक रुझूलों, स्झूस-पूर्व सस्थाओ दलवो का निर्मा' और द्रामीणो के लिए चिक्त्सा-परिचर्षा, व्यापार दैनिक सुविधाओं मे सुष आते हैं। इस उद्देश्य कै लिए आठवें दशक में करीवनत 600 अरब रूवल रे जाएँगे। यह महज एक बड़ी सख्या नही है, यह नगर प्रामीण क्षेत्रों ने म* सामाजिक अन्तर को खत्म करने के सत्य में एक बडी नीति है

खाद्य कार्यक्रम के साथ, सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की के द्वीय॑ सर्मि को प्नैनरी बैठक ने उत उपायों की प्रणाली को स्वीकृति दी, जो कुषि-औदोगिक सस्थान की व्यवस्था को सुधारने, आधिक मशीनरी, इसकी का्य॑वाहिए विकास वो पूृण्णता देने के लिए निर्मित किए गये हैं।

देश के आधिक जीवन का मूल लक्ष्य सामाजिक सम्पत्ति की बूंदधि करता श्रमिक जन की भौतिक सास्कृतिक स्तर में समात वृद्धि को आप्त करना है हालांकि, समृद्धि कल्याण खुद-ब खुद नही आते हैं, उन्हे लाता पडता है, खुद के हाथो से निमित १रना पडता है। सोवियत जन जानते हैं कि सिर्फ बाय द्वारा ही जीवन सुधारा जा सकता है और खुशनुमा बताया जा सकता है।

समाजवादी जीवन-पद्धति प्रत्येक को काम के अवसर की गारटी देती है। फिर, सोवियत सघ का सविधाव कहता है कि काम के अधिकार के अन्तर्यत रुचि सामर्थ्य, व्यवसायिक प्रशिक्षण शिक्षा के अनुरूप ब्यवसाय, उद्यम काम का निष्पक्ष चुनाव आता है काम के अधिकार के अन्तर्गत अपनी विशेषता के अनुरूप बेतन पाने का अधिकार भी है।

व्यवसायिक तकनीकी स्कूलो सस्थाओ के स्वातक को विशिष्दता प्राप्त करने के तुरन्त बाद काम की गारटी है। इसमे सामाजिक उत्पत्ति, लिंग, ष्ट्रीयता धार्मिक दृष्टिकोण की कोई भूमिका नही है। गर्भवती स्त्री को काम देने मे मनाही करना कानूनन दण्डनीय है मु

सोवियत नागरिक के लिए काम का अधिकार स्वठ प्रमाणित है। 50 वर्षो है अधिक समय तक सोवियत सप मे कोर्ट भी बेरोजगार नही है।

सोवियत जन महसूस करते हैं कि अ्त्येक परिवार का कल्‍्माण आनन्द साईजतिक सम्पत्ति की वृद्धि पर विर्भर रहता है। क्योकि समाजवादी समाज सार्वजतिक सम्पत्ति पर आधारित है, जो समाज के समस्त सदल्थों को समान

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स्थिति पर रखता है (प्रत्येक ध्यक्ति के श्रम-नित्रेश पर निर्भर होते हुए) और, इसलिए, यह सम्पत्ति जितनी समृद्ध होगी उतने ही अच्छी तरह मे सभूची जनता और विशेषतया, प्रत्येक परिवार रहेगा। देश की सम्पूर्ण सम्पत्ति का ताकिक दे पूर्ण उपयोग तथा इसका आधिक विकाम प्रत्येक व्यकित की रचनात्मक पहल श्रम-निवेश पर निर्भर बरता है। काम के प्रति प्रेम के बिना, उच्च कौशल के बिना कौई भी अपने काम को अच्छी प्रकार से नही कर सका है। और यह प्रेम वह है जो व्यक्ति में बचपन से ही पोषित किया जाता है। जनता के मध्य प्रमुख, निपुण शिल्पी, निर्माणकर्ता का नाम स्देव काफी मभादर से लिया जाता है। समाजवाद के अन्तर्गत सावंजनिक व्यक्तिगत हितों के सज्ञान में लाखो सोगो के लिए रचनात्मक अवधर बे अतुलनीय बढ़ा दिया है। श्रम सामूहिक सामाजिक उत्पादन की कार्यक्षमता को बढाने के लिए, ग्रुण को सुधारने के लिए तथा कच्चे माल के किफायती उपयोग के लिए उपयोगी पहल के स्रोत हैं उन्‍तत श्रमिक प्रवर्तक, दे सब जो विवेकपूर्व काम करते हैं समाज थे परिवार में आदर पाते हैं। अपने काम के स्थान पर श्रमिकों के दृष्टिकोण के बारे भे फ्रास में हुए सर्वेक्षण के समान सोवियत समाजशास्त्रियों ने मास्को मे कुईबाईशेव विद्युत उपकरण प्लाट पर एक सर्वेक्षण किया। सह पाया गया कि मत देने वाले 60% फ्रासीसी पुरुष स्त्री 'अपने काम को पसद नही करते हैं' जबकि सोवियत श्रमिको में सिफ 9% ने ऐसा उत्तर दिया "अपने सस्थात में आप सबसे अधिक बया नापसद करते हैं?” प्रश्न के उत्तर में अधिकाश फ्रासीसी पुरुषों स्त्रियों ने निर्भरता आधीतता पी भावना का उल्लेख किया सोवियत श्रमिक जो नापसद करते हैं. वह है श्रम की लय सदैव सम्तोषजनक नहीं है, अर्थात उन्होंने श्रम के प्रबन्ध पर आलोचनात्मक ध्टिकोण दिखलाया। “अन्य भ्रश्त “क्याआप विश्राम के समय पर अपने काम के बारे में सोचते हैं?" भी पर्दाफाश करने बाली है। पूंजीवादी भस्‍्थानों के 60% औृसक उत्तर दिया और अन्य 20 ये कहा कि वे घर पर फैक्टरी ५६,» की धप्की के मामले पर करते हैं) गए उत्तर बिलकुल भिन्‍न थे 75% अपने # अच्छी भावना” के साथ बात करते हैं और कु मे बात करते हैं। परन्तु परेशानियाँ « के प्रमुख के साथ श्रम के प्रबन्ध के + भिल्वता, या व्यवसाय के दुखद चुनाव के

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सोवियत पारिवारिक जीवन प्लाट, फैवटरी के श्रम धामूटिर से, सामूहिक गा राजकीय फाम से, जहाँ इसके सदस्य काम करते है, निकट रूप में जुड़ा है | भौर यह महज एक आधिक सम्पर्क नही है खुद श्रम सामूहिक को चिंता होती है अध्ययन, व्यवसायिक तरतत्री, उत्पादन के भ्रवस्ध में सक्रिय भागेदारी, रचिकर पारिवारिक अवकाश श्रमिकों के बच्चों के लालन-पालन हेतु अनुईूल परिः स्थितियों के निर्माण की

सावंजनिक सम्पत्ति समस्त श्रमरत जनो को जो समाज स्वय वे लिए वी करते हैं, उत्पादन के समान स्वामी वे भागीदार के रूप में जोडती है। समाजवादी समाज में सिवा थ्रमरत जन के कोई भी स्वामी गहीं है

सोवियत सघ में ऐसा एक भी परिवार नही है जिसके सदस्य किसी-ते-विसी प्रकार की सार्वजनिक गतिविधि में भाग लेते हो थम सामूहिकों द्वारा उत्तादर्त की थोजनाओ सस्थानों के सामाजिक-आधिक विकास पर विस्तारपूर्दक बहस होती है आधिक सूचाको की वृद्धि के साथ सामाजिक विकास की मोजनाएँ, काम करने की परिस्थितियों को सुधारने, धमिको के सामान्य शैक्षणिक सासहेतिक स्तर को उठाने, आवास, बच्चो की सस्थाओ साहृतिक मनोरजत की सुविधाओं के निर्माण रने, सक्षेपर मे, जनता के जीवन के भौतिद आध्यात्मिक आधार वो सुधारने के लक्ष्य मे उपायो को परिकल्पना की जाती है। श्रमरत जनों द्वारा विस्तृत बह हुए बिना कोई भी दीर्धकालीस आर्थिक विकास योजना प्रमुण समस्याओं द्वारा स्वीकारी नहीं जाती है। इसी पर प्रत्येक परिवार रुचि रखता है, वप्ोकि प्रस्येक वे जीवन में धुधार इस योजना के राफलतापूर्वक पूरे होने पर निर्भर करता है। 26वी वार्टी कारयेस के बढ़ते, (98।-83 के जिए तथा 2990 में समाप्त होने वाते समय के लिए सोवियत सध के आधिर सामाजिक विकास की रूप- रेखा” के प्रारूप पर गमस्तें जनता से बहस की | श्रमरत जनता ने अतेक प्रस्ताव पेश हिए + एक उदाहरण है उज़वेश सोवियत समाजवादी गणतस्त्र के शायर-दर्या क्षेत्र के गुलिस्तात छित्रे के अबदूबर सामूहिक फार्म से सुनिस्थोत अद्मेदोबा का पत्र ) सबसे पहते उसे उन परिर्थितियों का वर्णन जिया जिसे उसका परिवार रह रद है। मैं हगरी स्तेपी से खिय रही हूँ, जिसे प्राधीन बाल में छामोशी सोत सी जसीय वे रूप से जाता जाता था अब यह गुलिरता बहताता है। गर्म रेगिस्तान, जिसकी गर्मी उडती हुई चिहिया के क्यों तक को जमा देती घी, अब सोगो को बर्फ वे गमान सफ़ेद बधास और को वे अंगूरो की अतेक डिस्मों का उपड्वार देती है। पिछके वर्ष विर्फ हमारे सापूद्ित क्रामे ते ही मगभग 4000 टन 'हदेत स्वर्ण” (जैसा सोवियत संघ में कपास को अप कारिक

३२), ती टरैवटर में अधिक वे दिगाब मे झथ से बहा जाता है--सम्पाइर ), तीते डन इति हैबदर मे

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बैदा की श्रमिकों का औसत मासिक वेतन 250 से 300 रूबल ड्। पंडित दा.“ |

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अब्दुलगपफार दोनों मशीन आपरेंटर है, अवुघाशिम ड्राइवर वन गया है मेरे छोटे ७.००

बच्चे अभी भी स्कूल जाते हैं, परन्तु वे भी खाली समय पर बाम करत हैं लडके फार्म के वकेशोप में और लड़कियाँ डेयरी फार्म से काम करती हैं। हंस खुश हैं कि हमारे बच्चे अपनी आजीविका को अपने ही गाँव गे पा रहे हैं।

उजबेक महिला लिधती रही “इन दिनो हर घर मे छपरेया के प्रामप को बातें होती हैं, भविष्य के बारे मे हम एक-सा सोच रहे हैं। हम आपधारी हैं वि प्रास्प की प्रमुख चिन्ता हमारे लिए, सामान्य श्रमिक जनो के लिए, जनता वी खुशहाली काम पी बेहतर परिस्थितियों को निमित करने के लिए है | प्राखू्प के आठवें परिच्छेद “बच्चे वाले परिवारों और नवविवाहितों की राजकीय सद्रायता में वृद्धि”, "श्रमरत स्त्रियों की काम करने की परिस्थितियों मे, दैनिक जीवत की मुख-मुत्रिणओं हशा अवकाश आयाम में अषिक सुधार को मुरक्षित करना”, “ग्रामीण क्षेत्रों मे सेदा-सुविधाएँ सावंजनिक सुख-सुविधाओं मे अधिक वृद्धि-दर प्रदान करना”, से स्त्रियों विशेष रूप में खुश हैं। और यह भी जोड़ा गया है कि 98] हे श्रमिक माँओ के लिए एक आशिक देय अवकाश लागू किया जाएगा ताकि वे अपने बच्चो की देख भाल कर सकें जव तक कि वे एक वपं वे हो जाएँ। हम इन उपायो को तद्दे-दिल से स्वीकार १रते हैं।

मैं दस बच्चों को मो हूँ। मुझे 'हीरोइन माँ! की सम्मातजतक पदवी दी ग्रयी है। सिर्फ हमारे सामूहिक फार्म में ही ऐसी स्त्रियाँ 30 से अधिक हैं। और इससे 3-4 भुना अधिक स्थियाँ वे हैं जो सात से मो बच्चो को पाल रही हैं।

“इस सम्बन्ध में मैं वक्ष्षो वाले परिवारों को सहायता वासे अश मे, विशेष रूपए से अधिक बच्चो वालो को” शब्द जोइने का प्रस्ताव रखती हूँ $ जहाँ पर यह श्लावास-निर्माण की बात करता है, वहाँ पर मैं “गाँवों मे, विशेषकर अछती भूमि वाले क्षेत्रों मे गृह-निर्माण को आरम्भ करता” जोड़ने का प्रस्ताव रखती हूँ और जहाँ पर प्रारूप अतिरिकत-मुराल अध्ययत के विकास के बारे मे बहता है, यहाँ मैं जोइता चाहूँग्री “उच्चतर विधालयों पर अतिरिक्‍त-मुराल के पराद्यक्रम में प्रवेश देने से ग्रामीण युवाओं के लिए विशेषाधिकार स्थितियों को

विलयार है आठ 7पफ्ह४), हिए के एप के बार 7 राशा गा दा. हो विवि रर बीजस्पूविरट बड़ी की 26की काइ्ग ने लिर्दयी है और शोविदत सं ॥5 बरपुनिएट बादी के ब्दीय शधिति के शोहियक रष के मति हित है विद में प्रतिविरहिद्त दा है

सोवियत सादरिक अतुभद करता है हि जह एक राजशीए कर्मचारी है शो देश बी शमाध्षाओं बा गुसलातन झा सेया है। वह रसाशयादी ऋवजखटत का एक गहरबपूर का पू है

वामाजिर थ्र मे प्ररऐेष ध्यकित की भारेदरों मौर शारशतिर मोर सम्पतति के वितरण के सध्य मदूद राग्बस्ध समाज बादी जीबतलइविका तक्षण है यहू समाजवाद वे मूसख सिद्धांत मे प्रतिदिग्यित है. 'त्र'ऐेर को उसकी शमता डर अगुरूष, प्रस्येक को उधरी आवश्यकता के अनुरूप ।”

मौतिर सम्पत्ति का वितरण प्रमुख हुप मे मजद्ररों बेशत से होती है? सपाजयाद जे अन्तयंत यह परिवार के भौतिक कस्याथ का मृक्य सोत है।.__

सोवियत जग यह गिशिषित रूप मे जातते हैं वि झमात काम के लिए उन्हें समास येवन की गारटी है। यह पुरुषों के स्त्रियों दोतों पर, उप्र राष्ट्रोपता के बावजूद रामात रूप से सागू होता है। सोवियत संघ में न्यूनतम बैतते कॉलूर्न दवारा निश्चित है और विस भी प्रकार रे कस नहीं रिया जा सकता है। मजएरों ये वैतन देने के लिए आवश्यक कोप की मात्रा की योजना राज्य बनाता है। और फिर द्रैंड यूनियन काम के हिस्से तथा वेतन दरो को खुतिश्वित करने में सफ्वहा- पूरक भाग लेती हैं। सरद्ूरी वेतन को श्रम-तिवेश की मात्रा बयुणसे निश्चित किया जाता है। इससे यह पका हो जाता है हि व्यकित अपने काम के परिणाम में, उत्पादकता को बढाने में भौतिक रूप से रुचि सें, यह श्रमिकों को अपने कौशल को निरतर बढाने के लिए प्रेरित करते हुए अनुशाद्धित करता है? प्रत्येक सल्थाव में प्रोत्साहन के रुप में अंतिरिरत भौतिक प्रोत्साहुत-बोतस का उपयोग कियां जाता है। श्रमिक जो अपने काम से तथा अपनी सामाजिक ग्ति- विधियों में अच्छे परिणामों को दर्शाते हैं उन्हे राजकीय एराकार दिया जाता है।

अधिक अपेक्षाईत कम आय के मध्य के अन्तर को तिरतर कर्म जिया जा रहा है। सातवें दशा मे !00 रूबल प्रति व्यक्तित से अधिक मासिक आय काले श्रमिकों, अन्य कॉमगारों सामुहिक कृषकों के परिवारों की सद्या लगभग ही गयी ऐसे परिवारों की सख्या, जिनकी आय प्रति स्यकित 50 रूबले से है, भी लगभग इसी मात्रा से कम हो गयी है। इस प्रकार, ने सिफे /मिक जन के सभी समुह के जीवन स्तर मे अन्तर भी

लिप्रुनी प्रति मार्द ध्यय बढ़ रही हैं बल्कि श्र

समाप्त हो रहा है। के किए गये काम के अनुरूप वेर

अानन न» हाट शुषध्छी काट (न 2+>

नि परस्तु स्िफ एकमात्र ल्लोत नहीं है। भोतिक सासहतिक केक पु

पजस नागरिक सामाजिक उपभोग कोप से पाते हैं, तिरतेर है समाजवादी राज्य द्वारा नि शुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य परिचर्या, व्जोफे,-पेस्शन,, सा वाधिक अवकाश, स्फूल-यूं मस्थाओं के रख-रखाव आदि के भुगतात हेतु कार किए गये हूँ। इन कोयों के वितरण से राज्य तीद्र अभिसरण के हिन मे और समाजवादी समाज के सदस्यो की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बराबर करने में राज्य जनसख्या वे व्यय उपभोग के स्वरूप पर एक प्रभाव डालता है। अ्त्येक्र सोवियत नागरिक को, जैसा सोवियत स्ध के सविधान मे निर्दिष्ट है, वृद्धावस्‍्थां में, बीमारी और पूर्ण शा आशिक अपग्ता की घटना पर निर्वाह का अधिकार है। यद्दि कोई परिवार अपने कमाने वाले को खो देते हैं तव राज्य उरो तिरतर भौतिक सहायता देठा है। सोवियत क्रघ मे सामाजिक बीमा वा एक पहलू यह है कि ही श्रमिक और उसके परिवार के सदस्य भविष्य के पेंशन कोप मे बोई वित्तीम योगदान देते हैं। सोवियत मविधान ते इतिहास में पहली बार व्यवित के आवास के अधिकार को तिरूपित किया है। “यह अधिकार राज्य समाज के स्वामित्वयुकतत मकानों के विकास रखरखाव द्वारा, सहकारी व्यक्तिगत गहो के निर्माण हेतु सहायता द्वारा, सार्वजतिक तियत्रण के अस्तगेंत उन मकानों के सही वितरण द्वारा, जो अच्छे मकातो के निर्माण के कार्यत्रम को पूरा करने से उपलब्ध हुए हैं, और फम किराए एव सुविधाओं सेवाओं के लिए कम खर्च द्वारा सुरक्षित है: नागरिकों को नि शुल्द' आवास दिए जाते हैं। सोवियत सध मे किराया ससार में सबसे फभ है, इसका औसत परिवार वी आय के 3% से अधिक नहीं है। श्रमरत जनता दे श्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा चिकित्सा सेवा के विकार व्‌ सुधार को अत्यधिक महरव दिया जाता है स्वास्थ्य सुरक्षा के अधिकार को, जो सोवियत सप के सविधान द्वारा निरूपित है, राग्य द्वारा चिविस्सा विज्ञान स्वास्थ्य-निर्माण संस्थाओ के जास के विस्तार से, उपलब्ध नि शुल्क प्रामाणिक चिंवित्सा परिषर्या, सुरक्षा सफाई के दिकास और सुधार, विस्तृत प्रतिरोधक उपायों के भरमार; युवा पीदी के स्वास्थ्य के लिए विशेष ध्यात, नापरिकों के दी्घ सक्तिय जीवन को निश्चित करने हेतु बीमारी की रोकथाम फ्भो हेतु शोध द्वारा सुरक्षित विया जाता है। दसदें पंचवर्षीय काप्त (976-80) के दौरान डॉबटरों की सख्या 8 साख 34 हजार से 0 साथ हो गयी। अब प्रति साथ सोगो मे 334 डॉवटर हैं यह सद्या दिटेत, प्रात, अमेरिका जापान जैसे अनेक देशों से दुगुनी है। औसतन

अनेक देशों में चिकिरप्ता उपचार पर ख्यय परिवार के बजट का बडा ह्स्ता ता है | जमे, एक औसत अमेरिकी श्रमिक कमाने वाले प्रति 90 डालर में धर ) दालर चिकित्सा उपचार पर खर्च करता है समृद्ध अमेरिकी परिवारों ये वें 4 से 5 गुने अधिक हैं, हालांकि गठिया, जोडों मे सूजन, उच्च रक्तचाप, ह्व्नि रक्‍्त-प्रवाह सम्बन्धी विकार जैसी बीमारियाँ निम्न आय वर्ग के परिवारों प्ले से 8 गुना अधिक होती हैं। परिवार के बजट पर यह बडा खर्च इस तथ्य के 'रण है कि अप्रेरिका मे चिकित्सा पर स्यय काफ़ी ज्यादा है कुछ उदाहरण ते ने के एक्स-रे का दाम $5, टॉन्सिल के आपरेशन का दाम $500, अबू हा वें $,50 है। एक सोवियत परिवार इन पर कुछ नहीं खर्च करता है। किए तरोघक उद्देश्य हेतु बच्चो, मवयुवकों तथा कुछ श्रेणी के श्रमिकों की वार्दिर 'कित्सा जाँच आवश्यक होती है। जरूरत होने पर तुरत ही उपचार आरम्भ कर या जाता है।

स्वास्थ्य परिचर्या के विकास के लिए व्यवस्था सामाजिक उपभोग को५ हें भी ती है। इस प्रकार स्ाम/जिक उपभोग को श्रमिक जत के पारिदारिक बजट वी ; भारी हिस्सा है।

सत्ता के स्थानीय अग, यथा जनता के डिप्टी के सोवियत सामाजिक उपभोग के उपभोग का तिरीक्षण करते हैं। सामाजिक-आधिक' विकास की योजताओं प्रास्प के निर्माण के दौरान श्रम सामूहिक आवास, कित्डरगार्टन नर्स री, स्कृतिक-शैक्षणिक सहथाओ, अस्पतालों, स्वास्प्य-सुधारगृद्दो के निर्माण को और ता के सर्वाधिक विजरास हेतु परिस्थितियों के तिर्माण को तेजी से आरम्भ गरते जिन्तित होते हैं )

सोवियत राघ बे नागरिक जन्म, सामाजिक या सम्पत्ति के स्वर, नस्‍्त या डोयता, लिप, शिक्षा, भाषा, धर्मे दे प्रति दृष्टिकोण, व्यवयाय, अधिवाश के इजूद कायूत दे रामक्ष मात हैं।

अरूंगर बान्ति गे छुरत बाद सवीरारी ग्रयी 'जागीर मागरिक क्ों गी पारित पर! अधिषो पा ने समस्त पद बियो वे उपराधियों को समाप्त कर दिया। भी तगरिक, समाज में अपने पूर्ववर्ती स्तर के बावजूद अब समान घोषित वि और धनत्त विशेवार्धिका रों को सवाध्ण रर शव बया। सोदियन मापरिकों

ऋमार्शि्, हाजतीवित सोरह विक्त जीवन बे सभी शोंत्रों से सामागाता की

शा का हो बी है॥ अतिशार्य स्यक्िगत गुर्शो श्यवशाधिर प्रशिक्षण अपती पराई वे क्षेत्र से कास करते हे विस्यृत् अक्सरों को पाता

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है। और कोई भी तरवकी पा सकता है, कार्य सचालक बन सकता है, देश की प्रमुख मस्थाओं में चुता जा सकता है।

सोवियत सध मे श्रमिको, कृषकों बुद्धिजोबियों के जोवन-पद्धति के एक-्से पहलू यानी सोवियत पहलू बन रहे हैं। पूरी तरह से ध्मिक, पूरी तरह से किसान था पूरी तरह मे वुद्धिजीवी परिवारों की सख्या निरतर घट रही है। जैंमे, अकसर ऐसे परिधार मिलते हैं जिनमे माँ-आप खेती का काम करते हैं जबकि बड़े बच्चे शहूरों मे औद्योगिक सस्थानों पर हैं। या परिवार में पिता श्रमिक है, माँ डॉक्टर और बेटा या बेटी वैज्ञानिक | वुछ ही परिवार हैं जिसमे माँ-व!प बुद्धिजीवी हैं परन्तु उनके बच्चे ऑफिस में कर्मचारी। खुद '“बुद्धिजीबी' शब्द, जिराहे अब अकसर आशय समझा जाता है सास्कृतिक आध्यात्मिक परिप्कृति के एक विशेष स्तर बा, आजब सिर्फ़ विशान कला मे एक कामग्रार क॑ लिए बल्कि सभी प्रकार के श्रमिकों और कृपको के लिए भी अधिकदर उपयोग में क्षाया जा रहा है

अपने अस्तित्व के प्रथम दिन से ही सोवियत सत्ता ने पुरुषों स्त्रियों को समरात अ्रधिकार दिए। स्त्रियों की समस्या को सुलझाने में राज्य इस तथ्य की स्वीकार करते हुए आगे अग्नतर हुआ कि समाज में पूर्ण स्व॒तत्थता तव तक नही सकती है जब तक स्त्रियाँ सिर्फ कानूनी रूप मे बल्कि आधिक रूप में भी पूर्णतया रघतन्त्र हो पुरुषों स्त्रियों के लिए समात काम वर समान बेतन को निश्चित बरने' पर अधिधोषणा इसके अधिनियमो मे एक था।

"नागरिक विवाह, बच्चों तथा नागरिक पद के कार्यों के पजीकरण के आरम्भ पर! तथा 'तक्काक पर/ अधिघोषणाओ ने, जो सोवियत सत्ता की स्थापना के तुरत बाद लागू की गयी थी, विवाह परिवार के सम्बन्ध मे राज्य की नोति के मूल सिद्धांतों की वैधानिकता को तिरूपित किया। यदि कोई चर्च में विवाद् करना चाहता है, कर सकता है परन्तु अब चर्च परिवार पर पूर्ण अधिकार शही रखता है जैसा क्रान्ति-पूर्व था।

अपना उपनाम--पतति का या पत्ती का या एक सम्मान्य उपनाम--चुनने

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तप्प पर भी ध्यान रखा जार # पड शमाज हैं लिए माँ के मे री की पररिरा अति गहरवपूर्त है।

साविपत गंष $ शविधार में सोविदत शमाज मे रिपशे री हमातावी सुरक्षित रखा हपए है

33व अनुझोर कहता है, “सोडिए रच थे रिया पुरणों जो मताईे रत अधिडार है। दंगे अधिकार $ पाक्त को शिक्षा जे ब्यतापिर एुएं गोग्ताओं प्रशिक्षण में पृ्प के समान पहुँच, सौदरी, प्रारिश्रमिक रे तरकी में मौर मात: जिफ, राजनीतिक तपा रा/ए विफ बकिकियि में मात मअकगर दर हैपा रियो बे लिए विशेष थम वे एदापष् सुरक्षा उचायों द्वारा, माँओं हे कास ने लिए पर रिचितियों को बनाने के द्वारा, माँओ मे बच्चों के लिए भौतिक थे नैविर सहाय और कानूनी शुरक्षा के द्वारा, साथ मे अ्सूता बच्चों दासी स्त्रियों को सर्ेतर्तिक अवकाश अन्य साभ के द्वारा, और छोटे बच्चे वाली रित्रियों हे श्रम के समन में क्रमश अवनवि द्वारा सुरक्षित रिया जाता है ।”

राज्य ने परिवार की यु शा का उत्त रदापित्व से रखा है।

“परिवार जीवन को पूर्णता प्रदान रूस्‍ता है, पटिकार खुशियाँ साता है। परन्तु प्रत्येक परिवार, विशेष रूप मे समाजवादी शमाज के जीवत में, राज्य रें लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण घटक है,” प्रभिद बाल-शिदाक और लेखक ८० एम० मकरेन्को ने बहा। इसका अर्थ हुआ सोवियत दाज्य परिवार के खोयो बे सघ में रुचि रखता है, जो समाज के द्वारा सुरक्षित है, उन सदयों आदशों को निर्मित करत है जिसके लिए ये समाज का तिर्माण हुआ है।

स्थियो की परिवर्तित साम्राजिक स्थिति, उतकी स्वतश्नता पुस्थों के बराबर समा अधिकार परिवार में मनोवैज्ञानिक वातावरण को सुधारने की एक प्रमुख शर्ते है। समाजवाद के अन्तर्गत धारिवारिक रिश्तों के विकास में गृहस्पी के काम- काज का परिवार के सदस्यों के मध्य ताकिक वितरण एक महत्वपूर्ण पहलू है। स्त्री की समाजिक श्रम गतिविधि, उसकी भौतिक स्वतंत्रता परिवार मे, प्तमाज भें उसकी समानता को सुरक्षित करती है और उसकी मानवीय गरिमा को

बढ़ाती है।

सोवियत संघ की जनसब्या 26 करोड से अधिक हैं। चाहे कोई बाल्टिक समुदतद हे छोदी मछुवारी बहती में या काकेशस मे दा्धेल्तान के पहाड़ी गाँव में

मा छारकीय जैसे एक बडे ओद्योगिक शहर में जन्म से, चाहे उसने अपने माँ के करे पहले शब्दों को इस्टोनियाई, लैक्गित या चूकेती भाषा में गुना हो-- समन समाजवादी गणतत्र के बहुराष्ट्रीय सध का एक नागरिक है, जहाँ ५४ है बवआ कोई राष्ट्रीय झगड़ा नहीं है। रूसी और अमेंनियाई, नेनेट और सो शेहोहही और अवेस्यिच--मे सभी एक बडे परिवार के शाईें 4 किभिले नस | हढ ; के पे

पते

2व

लोग, राष्ट्रोयताएँ, राष्ट्रीय अल्पमख्यक हर बात पर एक-दूसरे को मदद करते हुए मिल-जुल कर रहते हैं।

स्पष्ट है, देश में मिथित विवाह होते हैं, एति एक राष्ट्रीयता का है और पत्नी दूसर।

अनेक राष्ट्रो राष्ट्रीयदाओं को सगठिठ एकत्रित करके, समाजवाद श्रेष्ठ राष्ट्रीय परम्पराओ नागरिक जीवन के स्वरूपो क॑ लिए विकास के विस्तृत पहलुओ को स्पष्ट करता है। शताब्दियों से निर्मित हर चीज़ हरेक द्वारा सुरक्षित है

चाहे कही पर कोई व्यक्त रहे, चाहे कही पर वह स्वय को पाए, वह अपने दैतृक घर की ही याद रखता है।

और साथ ही एक सोवियत नागरिक, उसकी राष्ट्रीयता चाहे जो हो, जहाँ कही भी बह जाए--पास्को, मिस्स्क, बाबू या वहीं भी, वह कभी भी अजनबी नही महसूस करता है, हर जगह वह धर पर है--देश का स्वामी है। एक बढ़े परिवार का, बहुराष्ट्रीय मृहभूमि के होने की भावना प्रत्येक सोवियत नागरिक वो शकित प्रदान करता है, और वह अपने देश के योग्य बने इस हेतु जीने काम करने का उद्यम करता है।

सोवियत सध में फलने-फूलते बाली सस्कृति अपनी विषय-वस्तु में समाज- बादी, राष्ट्रीय स्वरूप मे भिम्त और भावना घरित्र में अन्तर्राष्ट्रीय है। पह संस्कृति समस्त मौवियत सागरिक वी पतृष राम्पत्ति है।

इसके अन्तर्गत अप्रगामी रूसी सस्कृति की महान उपलब्धियाँ हैं, जिसने मसार को लोमोनोभोव, पुश्किन, टाल्स्टाय, गोर्की , घ्ंकोब्स्की, भेल्डेलेयेव, रेपिन और अन्य विख्यात विद्वान, कवि, लेखक, सगीतकार चित्रकार दिए हैं। इसके साथ ही समाजवादी समाज के निर्माण की प्रक्रिया मे प्रत्येक राष्ट्र की जो गुछ भी

श्रेष्ठ अत्यन्त बहुमूल्य सास्कृतिक धरोहर है उसे सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखा

>मसम»> कै भ० >नललभोरेकत सेट >डपनलके +अ०क कि. » जेगिरनन-न आन से जरिदीजननाओ पमन पैन लत» कक,

: करोड 40 लाप प्रतियाँ, ज्यूल़ वर्ने की | करोड 90 लाख प्रतियाँ, विधा! 'मर की पुस्तकों की | करोड 80 लाख प्रतियाँ आदि है। 200 जिलद में विश्व साहित्य का प्ुस्तकालय' तथा “बच्चो के लिए विश्व-साहित्य का हतकालय' अन्य अनेक जिल्दो के सस्करणो, जिनमे विदेशी लेखकों के सेठ हैं, की छपाई देश की पुस्तक-छपाई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ हैं। अति वर्ष माजवादी देशों से कोई 60-70 फिल्‍्मे और पूजीवादी देशों से 50-60 फिल्‍मे 7रीदी जाती हैं। सिनेमा कला के क्षेत्र में 00 देशों से और थियेदर संगीत मै गतिविधियों में ।20 देशो से सास्कृतिक सम्बन्ध हैं। सोवियत सघ में विदेशी एखात्ार श्रतिवर्ष औसतन 6000 सग्रीत महफ़्लि नाटकों का प्रदर्शन करते हैं लाखों सोवियत जनो में दया न्याय के उच्च मातववादी आदर्श शूट शूटकर परे हैं। यह जतता के हितो आवश्यक्तताओं के विकाग पर एर साभदायाः (भाव डालते हैं, स्पी-पुरुष के सस्वस्धों को उन्नत बरते हैं और उन प्रेम वो समृद्ध बरते है। समायवादी सास्हृतिक कार्ति ने विभिन्न राष्ट्रो के सारह॑तित वित्रास में राष्ट्रीय सस्‍्व में प्रूजत्ी अगमानता को समाप्त कर दिया है। इसे सुदृर सिर पूर् मे रह रहे घोध गे लोगो, जियके पास नार्तिशयू्व वर्ण घासा भी गे थी, “एड प्रतितिधि, भेरूषी लेखक यूरी रिश्लेव ने सही देग से कहा है. 'मपते 'र० से बादर आर और +छूल को जाते हुए मेरे दचपत ने छोटे बष्चों से बिना पबेन्समररें साथालरोदो छुरठ पार कर सी 7 एपो गाज में रह रट्टे ब्यजित के लिए, जह हूर कोई इसके धशारत में भाग | महतो है, पड हो रद्ा है इसरा रपट विधार रखना विशेष रूपये महरणपूर् जो विती वैजातिश हानते के सोचा नहीं जा भरता है॥4 978 में कस रच हे सापारप साध्यमिष शिक्षा अनिषपै कर दी धयी | जो ऐशावएजा तहते ये 4 दिलेष मास्यट्थर उच्च तर सशूसों मे अपन अध्यपत को जारी श्थ है१ह जहाँ जिशञत शुप्त ति शुष्दर है और क्ारो को दजीएणा भी समिता है॥ फर्धमिर उच्चार 76१७ दोता के पादूएकसा में प्रहि के शमाज के शिक्षा ' देशों बे झामाजिइ भम्वध्डा ते सप्दद वितय हैं। टिभिस्स साथ जिस वे | दि पर! शक वे, जत वि4(ध्द/अर खर १९ कहते बात पार दक्म खगरत जो थो िजद डी डिभी दी काका बे अपनी (टिका जारी रखते का अपगर “दव्क कर है स्यूप रा पर बजा दा कौ डिया फल' की लवपिव भो बहईआारदी हैं। हैने टिलेव टक्चरश 4 बाइएशिक टित बह हूँ ऋरं स्पवबाटटफ बधवण,

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जरतेक या चित्रकार बनने को शिक्षा दी जाती है। कि प् सेकुपरेटए (पके वैकर, मुनोम या ट्रैक्टर ड्राइवर बने रहते हुए चित्र बताना, गान गाता था सप्तकक् बनाना चाहते हैं, उनके लिए भी काफी अवसर हैं। शहरो, प्रान्तीय वेन्‍्द्रों, बस्तियों थे धड़े स्थानों मे सस्कृति के महल गृह, क्लब, विज्ञान तकनीक के गृह और भाषण-कक्ष घोले गये हूँ। अपने अवकाश के समय भें ] करोड़ सोनियत जन कला क्षेत्रों, स्टूडियो में अध्ययन करते हैं और जन थियेटरो मे अभिनय दिखाते हैं, जो कलात्मक रचनात्मकता मे उनकी आवश्यकताओं की सनुष्टि हेतु इन सास्कृतिक-शैस्णिक सल्याओ पर नि्ित हैं। समाज परिवार के आध्यात्मिक जीवन मे प्रचार सांधन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। पाठकों दशंको की आध्यात्मिक आवश्यकताओं को विकसित सन्तुष्ट करने को, आध्यात्मिक मूब्यों के प्रसारण वे! लिए और उन दर प्रत्येक की पहुँच के लिए समाघार पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो टेलीविश्ड का काम करते हैं। सोवियत सथ में विवेक की स्वतत्रत्ा कानून द्वारा स्थापित है। क्रोवियत संघ का स्विधान नागरिक के विवेक की स्वृतत्रता को गारंटी देता है, अर्थात कोई भी धर्म का प्रचार करने या हीं करने ओर धामिक पूजा-पाठ करने या मास्तिकता का प्रचार करने का अधिकार देता है। चर्च राज्य से पृषक है और स्कूल घर से इसका अथे हुआ कि राज्य व॑ इसके अग आस्तिकों या उतके समठनों की घामिक ग्रतिविधि में हस्तक्षेप नहीं करते हैं और घाभिक सगठन राजकीय मामलों में हस्तक्षेप नही करते हैं। सोवियत सघ में कोई भी आस्तिको के विरुद्ध नहीं है,

औदविस्य स्थापन के प्रस्तावों को पेश करता है। वलेरी सोवियत संघ की सुप्रीन सोवियत का एक डिप्टी है और सोवियत सघ की कम्युनिस्ट पार्टी की 26शी का््रेश् का एक प्रतिनिधि घा। वह खेलकूद मे और शौकिया रचनात्मक गतिविधि में भाग लेता है। वह अध्ययन करता है, काफो पढ़ता है, समाचार पत्र के लिए लिखता है और फिल्मे देखना पसद करता है। उसका अच्छा संगठित परिशर है और उसके कई मित्र हैं। ये सभी सम्बन्ध एक-दूसरे के पूरक बनकर परलर गुँधे हुए व्यक्ति के विभिन्‍न गुणों को स्पष्ट करते हैं। वयोकि तुम जितगा अपे आसपास के सोगो को दोये, उतना ही समृद्ध ठुम होगे।

जब कोई व्यक्ति यह अनुभव करता है कि दूसरों को उसकी छलरत है तव उसमे ताक़त जाती है, वह श्रेष्ठ बन जाता है। वह स्वार्थो नही बना रहता के बल्कि दूसरों के प्रति, अपने नशदीक के लोगो और अपने से दूर दीनों के अति आतुरता दर्शाता है, वह अपने परिवार की और समचे लोगो की सुशियों के ध््ति चितित होता है।

मोबियत जन का जीवन ऐसे कार्यों उपलब्धियों से भरा हुआ है जो एक बात को रोड सिद्ध करता है। युवा सैनिक अलेक्जेन्डर मत्नोमोव के अमर हाय को याद किया जा सकता है जिसने 94]-45 के महात देशभकिर के युद्ध के दौशन अपने शरीर से शत्रु के तोपों को रोका साहि अयने साथियों को मुध्यु है बचाया जाए और सोवियत क्षेत्र के एक भाग को धुन प्राप्त करने का उन्हें अव॒गर पिन सके बेलोस्सी द्रेंकटर-ड्राइवर मियाइस मोरोज की मृत्यु शास्तिकाल में 4] युद्ध के दौरान जपीन में ददी रह गयी बारूद उसके हाथो मे फटी, जब उसने पास में काम कर रहे लोगों को बचाने के लिए उसे दूर फेंकन का प्रयाग रिया

ये घटनाएँ विभिन्‍तर समय पर हुईं, परस्तु इतगे मे प्रत्येक सोवियत चरित्र